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नाथपा झाकरी एचपीएस

1500 मेगावाट क्षमता का नाथपा झाकड़ी जलविद्युत स्टेशन देश का सबसे बड़ा जलविद्युत प्लांट है। नाथपा झाकड़ी प्लांट प्रति वर्ष 6950.88 (6612) मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन करने के लिए डिजाइन किया गया है। परंतु प्लांट को गुणवत्ता प्रबंधन ने वार्षिक लक्ष्यों से अधिक विद्युत उत्पादन करने में सक्षम बनाया है।

नाथपा झाकड़ी परियोजना के निष्पादन के लिए भारत सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार के बीच जुलाई,1991 में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। नाथपा झाकड़ी जलविद्युत परियोजना को 50:50 के ऋण इक्विटीगत अनुपात के आधार पर वित्त पोषित किया गया है। परियोजना को विश्व बैंक से सहायता प्राप्त है। परियोजना को 8187 करोड़ रपए की लागत से पूरा किया गया था।

नाथपा झाकड़ी परियोजना को मई,2004 में कमीशन किया गया था तथा आधिकारिक तौर पर 28 मई,2005 को प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया।

नाथपा झाकड़ी जलविद्युत प्लांट से विद्युत का आबंटन उत्तर भारतीय राज्यों हरियाणा, हि.प्र., पंजाब, जम्मू एवं कश्मीर, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड तथा दिल्ली व चंडीगढ़ के सभी शहरों को होता है जिससे ग्रिड इस क्षेत्र में विद्युत की कमी को दूर करने के लिए सक्षम है।

परियोजना क्षेत्र के आसपास रहने वाले लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास के अलावा, 1500 मेगावाट की नाथपा झाकड़ी जलविद्युत परियोजना को इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि यह 90% विश्वसनीय वर्ष में और 95% मशीन उपलब्धता के साथ औसतन 6950.88 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन कर सके। यह परियोजना उत्तरी ग्रिड को 1500 मेगावाट की महत्वपूर्ण पीकिंग पावर उपलब्ध करा रही है।

बस-बार पर कुल उत्पादित विद्युत में से 12 प्रतिशत बिजली गृह राज्य हिमाचल प्रदेश को निःशुल्क प्रदान की जाती है। शेष 88 प्रतिशत विद्युत में से 25 प्रतिशत हिमाचल प्रदेश को बस-बार दरों पर दी जाती है। भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय द्वारा शेष विद्युत उत्तरी क्षेत्र के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निम्नानुसार आवंटित की गई है:

क्र. सं.राज्यआवंटन (मेगावाट में)स्थापित क्षमता के प्रतिशत के रूप में
 कुल1500100
1.हरियाणा644.27
2.हिमाचल प्रदेश *54736.47
3.जम्मू एवं कश्मीर1057.00
4.पंजाब1147.60
5.राजस्थान1127.47
6.उत्तर प्रदेश22114.73
7.उत्तराखण्ड382.53
8.चंडीगढ़080.53
9.दिल्ली1429.47
10.केंद्रीय सरकार के अधिकार में अनावंटित कोटा **1499.93

इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र को कृषि और औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि के रूप म

क्र. सं.विवरणदिनांक
1.1020 मेगावाट की स्थापित क्षमता वाली तथा हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत मंडल द्वारा निष्पादित की जाने वाली ₹538.38 करोड़ की अनुमानित लागत वाली परियोजना को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की स्वीकृति।फरवरी, 1980
2.पर्यावरण संबंधी मंजूरी।जून, 1980
3.दिसंबर, 1985 के मूल्य स्तर पर ₹1649.17 करोड़ की अनुमानित लागत वाली 1500 मेगावाट की स्थापित क्षमता के लिए केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण से प्राप्त प्रौद्योगिकी स्वीकृति।मई, 1986
4.वन संबंधी मंजूरी।जुलाई, 1986
5.पीआईबी अनुमोदन।जनवरी, 1988
6.सतलुज जल विद्युत निगम का गठन।मई, 1988
7.मार्च, 1989 में ₹1678.02 करोड़ की स्वीकृत लागत पर 1500 मेगावाट की स्थापित क्षमता के लिए सीसीईए अनुमोदन।मार्च, 1989
8.सितंबर, 1988 के मूल्य स्तर पर ₹1678.02 करोड़ की अनुमानित लागत पर नाथपा झाकड़ी जल विद्युत निगम (6x250 मेगावाट) का निष्पादन सतलुज जल विद्युत निगम द्वारा करवाने का भारत सरकार अनुमोदन।अप्रैल, 1989
9.437 मिलियन अमेरिकी डॉलर की विश्व बैंक सहायता प्राप्त करने के लिए भारत सरकार से अनुमोदन।अप्रैल, 1989
10.विश्व बैंक ऋण करार पर हस्ताक्षर।मई, 1989
11.विश्व बैंक ऋण प्रभावी होना।जनवरी, 1990
12.केंद्रीय विद्युत राज्य मंत्री तथा एनईएस, भारत सरकार और मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश सरकार के बीच करार पर हस्ताक्षर।जुलाई, 1991
13.सतलुज जल विद्युत निगम द्वारा आधिकारिक रूप से नाथपा झाकड़ी जल विद्युत परियोजना का ग्रहण।अगस्त, 1991
14.हि.प्र.रा.वि.मं. के कर्मचारियों के आंदोलन के कारण परियोजना को प्रभावी रूप से ग्रहण करने में विलंब।फरवरी, 1992
15.आरसीई-I के लिए पीआईबी अनुमोदन।अप्रैल, 1993
16.आरसीई-I के लिए सीसीईए अनुमोदन।जून, 1993
17.मुख्य सिविल निर्माण संविदाएं प्रदान की गईं।जून, 1993
18.जनरेटिंग इकाइयों और संबद्ध उपकरणों के लिए संविदा प्रदान की गई।नवंबर, 1994
19.₹7179.64 करोड़ की संशोधित लागत तथा सभी इकाइयों की मार्च, 2002 तक कमीशनिंग की संशोधित अनुसूची सहित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण को प्रस्तुत की गई।मई, 1997
20.₹7217.05 करोड़ की संशोधित लागत एवं सभी इकाइयों की मार्च, 2002 तक कमीशनिंग की संशोधित अनुसूची को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा अनुमोदन।नवंबर, 1997
21.विश्व बैंक ऋणों का पुनर्वर्गीकरण करने और बंद होने की तिथि बढ़ाने के लिए आवेदन पत्र प्रस्तुत।दिसंबर, 1997
22.विश्व बैंक द्वारा ऋणों का पुनर्वर्गीकरण और 31 दिसंबर, 1998 तक विस्तार।दिसंबर, 1997
23.विद्युत मंत्रालय को आरसीई-II का पूर्व पीआईबी ज्ञापन प्रस्तुत।जनवरी, 1998
24.पूर्व पीआईबी बैठक आयोजित।जुलाई, 1998
25.₹7666.31 करोड़ के आरसीई-II को पीआईबी स्वीकृति।नवंबर, 1998
26.₹7666.31 करोड़ के आरसीई-II को सीसीईए स्वीकृति।मई, 1998
27.सितंबर, 2001 के मूल्य स्तर पर ₹9083.34 करोड़ के आरसीई-III सहित आरडीपीआर प्रस्तुत।दिसंबर, 2001
28.₹6218.29 करोड़ की पक्की लागत (निर्माण के दौरान ब्याज एवं दावों को छोड़कर) के आरसीई-III को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण की मंजूरी।दिसंबर, 2002
29.सितंबर, 2002 के मूल्य स्तर पर ₹8656.61 करोड़ के आरसीई-III सहित पूर्व पीआईबी ज्ञापन विद्युत मंत्रालय को प्रस्तुत। (*बास्पा चरण-II परियोजना हेतु इंटर-कनेक्शन सुविधा की लागत ₹62.86 करोड़ निर्धारित कर इसे पूंजीगत लागत से घटाया गया है तथा कट एंड कवर सुरंग विस्तार हेतु ₹50 करोड़ जोड़े गए हैं।)अप्रैल, 2003
30.बांध में भराव प्रारंभ, गाद छनाई कक्ष संख्या 4 एवं 27.4 किमी लंबी मुख्य सुरंग का चार्जिंग, इकाई संख्या 5 का प्रारंभ।28 अगस्त, 2003
31.इकाई संख्या 5 का समक्रमण।20 सितंबर, 2003
32.इकाई संख्या 5 की कमीशनिंग (वाणिज्यिक उत्पादन)।6 अक्टूबर, 2003
33.परियोजना की प्रथम इकाई (इकाई #5) का उद्घाटन।14 अक्टूबर, 2003
34.इकाई संख्या 6 का समक्रमण।23 नवंबर, 2003
35.इकाई संख्या 6 की कमीशनिंग (वाणिज्यिक उत्पादन)।2 जनवरी, 2004
36.इकाई संख्या 4 का समक्रमण (परीक्षण लोड)।22 जनवरी, 2004
37.इकाई संख्या 3 का समक्रमण (परीक्षण लोड)।13 फरवरी, 2004
38.इकाई संख्या 2 का समक्रमण (परीक्षण लोड)।9 मार्च, 2004
39.भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय एवं सतलुज जल विद्युत निगम के बीच 2004-05 के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर।29 मार्च, 2004
40.इकाई संख्या 4 की कमीशनिंग (वाणिज्यिक उत्पादन)।30 मार्च, 2004
41.इकाई संख्या 1 का समक्रमण (परीक्षण लोड)।31 मार्च, 2004
42.इकाई संख्या 3 की कमीशनिंग (वाणिज्यिक उत्पादन)।31 मार्च, 2004
43.इकाई संख्या 2 की कमीशनिंग (वाणिज्यिक उत्पादन)।6 मई, 2004
44.इकाई संख्या 1 की कमीशनिंग (वाणिज्यिक उत्पादन)।18 मई, 2004
45.एसजेवीएन ने ISO 9001:2000 प्रमाणन प्राप्त किया।2 फरवरी, 2005
46.भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री मनमोहन सिंह द्वारा नाथपा झाकड़ी जलविद्युत परियोजना राष्ट्र को समर्पित।28 मई, 2005

नाथपा में सतलुज नदी पर 62.50 मीटर ऊँचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया गया है, जिसके माध्यम से 486 क्यूमेक्स पानी चार इनटेकों में डाला जाता है।

प्रत्येक 525 मीटर लंबाई, 16.31 मीटर चौड़ाई और 27.5 मीटर गहराई वाले चार चैम्बरों के साथ एक विशाल भूमिगत डीसिल्टिंग कॉम्प्लेक्स निर्मित किया गया है।

सर्ज शाफ्ट तक 27.394 किलोमीटर लंबी और 10.15 मीटर व्यास की हेड रेस टनल (Head Race Tunnel) बनाई गई है।

सर्ज शाफ्ट 301 मीटर गहरा और 21.60 मीटर व्यास वाला है, जो ऊपर से खुला (Open-to-Sky) है।

4.90 मीटर व्यास वाली तीन सर्कुलर स्टील-लाइनड प्रेशर शाफ्टें निर्मित की गई हैं, जिन्हें विद्युत गृह के समीप छह उत्पादन इकाइयों की आपूर्ति के लिए दो भागों में विभाजित किया गया है।

कुल 1500 मेगावाट स्थापित क्षमता की छह उत्पादन इकाइयों में प्रत्येक में 250 मेगावाट की वर्टिकल एक्सिस फ्रांसिस टरबाइन (Vertical Axis Francis Turbine) स्थापित है।

परियोजना में 10.15 मीटर व्यास और 982 मीटर लंबाई वाली टेल रेस टनल (Tail Race Tunnel) भी शामिल है।