- आईसी संगठन के कर्मचारियों द्वारा की गई यौन उत्पीड़न की शिकायतों को प्राप्त करने, उनकी जाँच करने और उनका समाधान करने के लिए उत्तरदायी है। यह यौन उत्पीड़न के संबंध में जागरूकता उत्पन्न करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह संगठन के भीतर इस तरह के व्यवहार के लिए शून्य सहिष्णुता की संस्कृति को बढ़ावा देने में सहायता करती है। आईसी के नियम यौन उत्पीड़न रोकथाम (पीओएसएच) अधिनियम द्वारा अभिशासित होते हैं। आईसी यौन उत्पीड़न के संबंध में जागरूकता उत्पन्न करने और संगठन के भीतर इस तरह के व्यवहार के लिए शून्य सहिष्णुता की संस्कृति को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह उल्लिखित करना महत्वपूर्ण है कि आईसी न्यायिक निकाय नहीं है और उसके पास दंड लगाने का अधिकार नहीं है। हालाँकि, समिति आरोपी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है और संगठन को जाँच के निष्कर्षों के आधार पर उचित कार्रवाई करनी चाहिए। आंतरिक समिति (आईसी) के उद्देश्य- इसके उद्देश्यों में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकना और उनका निवारण करना, सुरक्षित एवं सम्मानजनक कार्य वातावरण बनाना और पीओएसएच अधिनियम का अनुपालन सुनिश्चित करना शामिल है।
- आंतरिक समिति (आईसी) में मानव संसाधन की भूमिका- मानव संसाधन विभाग पीओएसएच नीति को लागू करने, जागरूकता उत्पन्न करने, प्रशिक्षण आयोजित करने और पीओएसएच अधिनियम का अनुपालन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मानव संसाधन प्रभाग भी पीओएसएच समिति को उसकी कार्य पद्धति में सहायता करता है।
- आंतरिक समिति (आईसी) द्वारा दंड- पीओएसएच अधिनियम इसके प्रावधानों का उल्लंघन नियोक्ताओं और व्यक्तियों के लिए विभिन्न दंड निर्धारित करता है, जिसमें डांटने(फटकार लगाने) से लेकर रोजगार की समाप्ति तक शामिल है।
- पीओएसएच एक्ट का कार्यक्षेत्र - पीओएसएच एक्ट सरकारी कार्यालयों, निजी कंपनियों, शैक्षणिक संस्थानों और गैर सरकारी संगठनों सहित सभी कार्यस्थलों पर लागू होता है। इसमें अवांछित शारीरिक संपर्क, मौखिक दुर्व्यवहार और द्वेषपूर्ण कार्य वातावरण के निर्माण सहित यौन प्रस्तावों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है।
- कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न सभी कार्यस्थलों पर चिंता का विषय है। इससे कई तरह की लागतें उत्पन्न होती हैं, जो पीड़ित व्यक्ति, वह व्यक्ति जिसके खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है, अन्य कर्मचारी और कार्यालय सहित व्यक्तिगत व्यक्ति को प्रभावित करती हैं। हमारे पास पीओएसएच अधिनियम (कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 नामक एक समर्पित कानून है।
- इस अधिनियम के तहत, कोई भी पीड़ित महिला कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की घटना की तारीख से तीन माह की अवधि के भीतर आंतरिक समिति को लिखित रूप में शिकायत दर्ज करा सकती है और घटनाओं की एक श्रृंखला के मामले में, अंतिम घटना की तारीख से तीन माह की अवधि के भीतर शिकायत दर्ज करा सकती है।
- बशर्ते कि जहां ऐसी शिकायत लिखित रूप में दर्ज नहीं की जा सकती है, वहां पीठासीन अधिकारी या आंतरिक समिति का कोई भी सदस्य महिला को लिखित रूप में शिकायत दर्ज करने के लिए सभी उचित सहायता प्रदान करेगा।
- यह भी प्रावधान है कि आंतरिक समिति, लिखित में दर्ज किए जाने वाले कारणों से, तीन माह से अधिक की समय-सीमा को बढ़ा सकती है, यदि वह संतुष्ट हो कि परिस्थितियाँ ऐसी थीं, जिनके कारण महिला निर्धारित अवधि के भीतर शिकायत दर्ज नहीं कर सकी।
- जहाँ पीड़ित महिला अपनी शारीरिक या मानसिक अक्षमता या देहांत या अन्य कारणों से शिकायत करने में असमर्थ है, वहाँ उसका कानूनी उत्तराधिकारी या ऐसा कोई अन्य व्यक्ति, जिसे विहित किया जा सकता है,पीओएसएच अधिनियम के प्रावधान के अंतर्गत इस संबंध में शिकायत दर्ज कर सकता है।
मौखिक
1. किसी वयस्क को लड़की, हंक, गुड़िया, बेब या हनी कहकर संबोधित करना
2. किसी पर सीटी बजाना, कैट कॉल करना
3. किसी व्यक्ति के शरीर के बारे में यौन टिप्पणी करना
4. यौन टिप्पणी या इशारे करना
5. कार्य चर्चा को यौन विषयों की ओर मोड़ना
6. यौन चुटकुले या कहानियाँ सुनाना।
7. यौन कल्पनाओं, वरीयताओं या इतिहास के बारे में पूछना
8. सामाजिक या यौन जीवन के बारे में व्यक्तिगत प्रश्न पूछना
9. चुंबन की आवाज़ निकालना, चीखना और होंठ चटकाना
10. किसी व्यक्ति के कपड़ों, शारीरिक रचना या रूप-रंग के बारे में यौन टिप्पणियाँ करना
11. किसी ऐसे व्यक्ति को बार-बार आमंत्रित करना जो दिलचस्पी नहीं रखता
12. किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत यौन जीवन के बारे में झूठ बोलना या अफ़वाहें फैलाना
शारीरिक
1. गर्दन या कंधों के आसपास मसाज करना
2. व्यक्ति के कपड़ों, बालों या शरीर को छूना
3. गले लगाना, चूमना, थपथपाना या सहलाना
4. किसी दूसरे व्यक्ति के आस-पास यौन रूप से छूना या रगड़ना
5. किसी दूसरे व्यक्ति के करीब खड़ा होना या उससे टकराना
अशाब्दिक
1. किसी व्यक्ति को ऊपर से नीचे तक देखना (एलेवेटर आईज़)
2. किसी को घूरना
3. किसी व्यक्ति का रास्ता रोकना
4. उस व्यक्ति का पीछा करना
पीठासीन अधिकारी: पीठासीन अधिकारी एक महिला होगी जो यौन उत्पीड़न की शिकायत की जांच करने के लिए उत्तरदायी होगी। वह संगठन की वरिष्ठ स्तर की कर्मचारी होनी चाहिए। सदस्य: आईसी के कम से कम आधे सदस्य महिलाएँ होनी चाहिए। ये सदस्य संगठन के विविध कार्यबल का प्रतिनिधित्व करने वाले होने चाहिए। उन्हें यौन उत्पीड़न से संबंधित मुद्दों से निपटने का अनुभव होना चाहिए। एनजीओ/एसोसिएशन प्रतिनिधि: आईसी का एक सदस्य गैर-सरकारी संगठन या महिलाओं के हितों के लिए प्रतिबद्ध एसोसिएशन से होना चाहिए। इस सदस्य को यौन उत्पीड़न से संबंधित मुद्दों से निपटने का ज्ञान और अनुभव होना चाहिए।
विशेषज्ञ सदस्य:
क. आईसी का एक सदस्य यौन उत्पीड़न से संबंधित मुद्दों से परिचित होना चाहिए। यह कोई विद्वान, कानूनी विशेषज्ञ या ऐसे मुद्दों से निपटने में अनुभव रखने वाला व्यक्ति हो सकता है। आंतरिक समिति यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि संगठन पीओएसएच अधिनियम का अनुपालन करता है और कर्मचारियों को कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से बचाया जाता है। आईसी यौन उत्पीड़न की शिकायतें प्राप्त करने, जांच करने और समाधान के लिए सिफारिशें करने के लिए उत्तरदायी है।
ख. बाहरी सदस्य कोई भी व्यक्ति हो सकता है जो महिलाओं के मुद्दों के लिए समर्पित एनजीओ या एसोसिएशन से जुड़ा हो या यौन उत्पीड़न के मुद्दों के संबंध में पूर्ण जानकारी रखता हो।
- इस अधिनियम का उद्देश्य हमारे देश में महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल बनाना और उनकी गरिमा की रक्षा करना है। यह अनिवार्य है कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले प्रत्येक संगठन को एक आंतरिक समिति (आईसी) बनानी चाहिए जो कार्यस्थलों पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों की जांच करेगी। इस अधिनियम में आईसी सदस्य बनने के लिए आवश्यक योग्यताएं, उनका कार्यकाल, निष्कासन के आधार आदि निर्दिष्ट किए गए हैं। एसजेवीएन ने भी अपनी सभी प्रशासनिक इकाइयों और परियोजनाओं के लिए आंतरिक शिकायत समितियों का गठन किया है।
कानून के अनुसार आईसी केवल उन शिकायतों पर विचार कर सकता है जिनमें पीड़ित व्यक्ति महिला हो। यहाँ एक चरणबद्ध प्रक्रिया दी गई है जो आंतरिक शिकायत समिति (आईसी) को कार्यस्थल पर पीओएसएच अधिनियम के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में सहायक होगी।
चरण 1: अधिकार क्षेत्र - जब आईसी को लिखित शिकायत प्राप्त होती है, तो सबसे पहले उसके अधिकार क्षेत्र की जांच करनी चाहिए। यह पता लगाने के लिए कि क्या आईसी के पास शिकायत के निपटान का अधिकार है, निम्नलिखित बिंदुओं को शामिल किया जाना चाहिए:
क. शिकायतकर्ता के साथ-साथ प्रतिवादी की पहचान भी शिकायत में उल्लिखित है।
ख. लगाए गए आरोप पीओएसएच अधिनियम के अनुसार यौन उत्पीड़न की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं।
ग. घटना की अंतिम तिथि से 3 माह की अवधि के भीतर शिकायत दर्ज की गई है। आईसी के पास तीन माह का अतिरिक्त विस्तार देने का विवेकाधीन अधिकार है।
घ. प्रतिवादी एसजेवीएन लिमिटेड का कर्मचारी है।
ड़. कथित घटना कार्यस्थल पर घटित हुई है।
चरण 2: शिकायतकर्ता के साथ परिचयात्मक वार्ता- जब आईसी ने अपना अधिकार क्षेत्र निर्धारित कर लिया है, तो अगला कदम शिकायतकर्ता के साथ परिचयात्मक वार्ता करना है। इस वार्ता का उद्देश्य आरोपों को बेहतर ढंग से समझना, कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध निवारण विकल्पों को समझाना है।
चरण 3: प्रतिवादी(ओं) के साथ परिचयात्मक वार्ता - अगला चरण प्रतिवादी(ओं) के साथ परिचयात्मक वार्ता करना है। इस वार्ता का उद्देश्य प्रतिवादी(ओं) को शिकायत से अवगत कराना, उन्हें प्रक्रिया और उनके अधिकारों के बारे में सूचित करना है।
चरण 4: शिकायत की प्रति प्रतिवादी(ओं) को अग्रेषित करें- जब आईसी प्रतिवादी(ओं) से वार्ता कर ले, तो उसे शिकायत की एक कॉपी उन्हें अग्रेषित करनी चाहिए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आईसी न्यायोचित और निष्पक्ष तरीके से काम करे और प्रतिवादी(ओं) को अपनी बात रखने का अवसर प्रदान करे। इसका उल्लेख न केवल पीओएसएच अधिनियम में किया गया है, अपितु न्यायालयों द्वारा भी दोहराया गया है। इसके अलावा, आईसी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि यह शिकायत दर्ज करने की तारीख से 7 कार्य दिवसों की अवधि के भीतर किया जाए। जब प्रतिवादी(ओं) को शिकायत की प्रति प्राप्त हो, तो उन्हें अपना लिखित उत्तर दाखिल करने के लिए 10 कार्य दिवसों की अवधि मिलती है।
चरण 5: शिकायतकर्ता से उसके द्वारा चयनित निवारण विकल्प के बारे में जानकारी हासिल करें - शिकायतकर्ता को सुलह या जांच में से किसी एक को चुनने का अधिकार है, सुलह एक तरह का समझौता है जिसका अनुरोध केवल शिकायतकर्ता द्वारा लिखित रूप में और जांच आरंभ होने से पहले ही किया जा सकता है। यदि शिकायतकर्ता सुलह के विकल्प का चयन करता है, तो यह प्रतिवादी (प्रतिवादियों) को बताना होगा, जिन्हें तब सुलह की शर्तों को स्वीकार करने, अस्वीकार करने या नेगोंशिएट करने का अधिकार मिलता है।
चरण 6: शिकायतकर्ता, प्रतिवादी(ओं) और गवाहों की जांच- अगर शिकायतकर्ता जांच का विकल्प चुनता है, तो अगला कदम व्यक्तिगत रूप से दोनों पक्षों और गवाहों (यदि कोई हो) से मिलना है, ताकि शिकायत के संबंध में विस्तृत वार्तालाप किया जा सके और ऐसे प्रश्न पूछे जा सकें जो आईसी को यह पता लगाने में मदद करें कि आरोपों की पुष्टि की जा सकती है अथवा नहीं। प्रश्न ओपन एंडीड होने चाहिए; वे लिडिंग या व्यक्तिगत प्रकृति के नहीं होने चाहिए।
चरण 7: पूछताछ (क्रॉस-एग्जामिनेशन)- एक बार जब पक्षों के व्यक्तिगत बयान दर्ज हो जाते हैं, तो अगला चरण पक्षों को एक-दूसरे से जिरह(क्रॉस-क्वैश्चन) करने देना होता है। इस चरण में, शिकायतकर्ता और प्रतिवादी आमने-सामने आएंगे और प्रश्न पूछेंगे, जिसमें तीखे प्रश्न भी शामिल हैं। यहां आईसी की भूमिका वार्तालाप की निगरानी करना और किसी भी व्यक्तिगत या अपमानजनक प्रश्न को रोकना है। पक्षों द्वारा अपने चयन के गवाहों से भी क्रॉस-एग्जामिनेशन किया जा सकता हैं। असाधारण परिस्थितियों में, लिखित क्रॉस-एग्जामिनेशन की अनुमति दी जा सकती है।
चरण 8: वार्तालाप - यह अंतिम और वैकल्पिक चरण है, जिसमें आईसी किसी भी पक्ष या गवाह से वार्तालाप कर सकता है, यदि उसे निष्कर्ष निकालने से पहले किसी और स्पष्टीकरण की आवश्यकता हो। यहां, प्रमुख प्रश्न (लिडिंग) पूछे जा सकते हैं। उपर्युक्त सभी चरणों को 90 दिनों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।
चरण 9: जांच रिपोर्ट- अब आईसी को एक जांच रिपोर्ट तैयार करनी होगी, जिसमें कुछ सिफारिशें होंगी, कि यदि आरोप पुष्ट होते हैं या यह एक झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायत है। रिपोर्ट तैयार करके 10 दिनों के भीतर नियोक्ता को भेजनी होगी। एक बार ऐसा हो जाने के बाद, नियोक्ता की सिफारिशों को निष्पादित करने के लिए 60 दिन मिलते हैं। यह वे व्यापक कदम हैं, जिनका आंतरिक शिकायत समिति (आईसी) को कार्यस्थल पर महिला कर्मचारियों की यौन उत्पीड़न की शिकायत से निपटने के दौरान अनुपालन करना चाहिए।
- 1. कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतें प्राप्त करना
- 2. स्थापित प्रक्रिया के अनुसार जांच आरंभ करना और उसका संचालन करना
- 3. जांच के लिए निष्कर्ष और सिफारिशें प्रस्तुत करना
- 4. समुचित कार्रवाई के कार्यान्वयन में नियोक्ता के साथ समन्वय करना
- 5. स्थापित दिशा-निर्देशों के अनुसार पूरी प्रक्रिया के दौरान कड़ी गोपनीयता बनाए रखना।
- 6. निर्धारित प्रारूप में वार्षिक रिपोर्टें प्रस्तुत करना।